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क्या यू.एस. टैरिफ़ भारत के लिए घातक है? – डॉ. नीलिमा दुबे

29th January 2026

https://medium.com/@dneelima53/%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AF%E0%A5%82-%E0%A4%8F%E0%A4%B8-%E0%A4%9F%E0%A5%88%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A5%9E-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%98%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%B9%E0%A5%88-79e2260d5d4d

“टैरिफ़” अर्थव्यावस्था की दृष्टि से कर प्रणालि है। विद्वानों की माने तो “टैरिफ़ वह टेक्स यानि कर है जो किसी देश द्वारा दूसरे देश से आयात किए गए सामानों पर लगाया जाता है”- जब कोई विदेशी सामान किसी देश में आता है तो उसके आयातक को यह कर देना होता है। टैरिफ़ कोइ नई व्यवस्था नहीं है,इसका प्रयोग अनेक दशकों से चला आ रहा है।हर राष्ट्र अपने अनुसार इस कर को लागू करता है। यह कर विदेशी व्यापार नीति का हिस्सा होता है। भारत के संदर्भ में अगर टैरिफ़ देखा जाय तो कई वर्षों से भारत भी आयातित उत्पादों पर अधिकाधिक टैरिफ़ लगाता रहा है क्योंकि हमारे देश का उद्देश्य स्पष्ट है कि किसी भी कीमत पर घरेलू उद्योगों की सुरक्षा होनी चाहिए। परिणामत: विदेशी उत्पाद (Products) को टैरिफ़ द्वारा महंगा किया जाता है ताकि लोग घरेलू उत्पाद खरीदें। इसे भारत की रक्षा उन्मुख व्यापार नीति कहा जाता है।

विदेशी व्यापार नीति के अंतर्गत हर देश स्वतंत्र है। अमेरिका हमेशा मुक्त व्यापार नीति पर चलता आया है, परंतु 06 अगस्त 2025 से टैरिफ़ की चर्चा अंतराष्ट्रीय मंच पर सुर्खियों में बनी हुई है। इस दिन अमेरिका के राष्ट्रपति श्री ट्रंप ने अपने देश की नई टैरिफ़ कर की घोषणा की। ट्रंप के अनुसार अमेरिका को एक बार फ़िर महान बनाने के लिए उनकी सरकार ने विश्व के अनेक देशों पर टैरिफ़ निर्धारित कर दिए।

टैरिफ़ के प्रकार:

अ)- एड वेलोरम टैरिफ़- इसमें किस बी उत्पाद के मूल्य का 10 फ़ीसदी 10% टैरिफ़ लगाया जाता है।

ब)- स्पेसिफ़िक टैरिफ़- इसमें प्रति यूनिट एक निश्चित राशि, जैसे प्रतिकिलो पर 50 रुपय का टैरिफ़ लगता है।

स)- रेसिप्रोकल टैरिफ़- यह वह टैरिफ़ है जो कोई देश किसी अन्य देश की ओर से लगाए गये टैरिफ़ के जवाब में लगाता है।

अमेरिका : टैरिफ़ 2025

इस संदर्भ में यह ध्यान रखने योग्य बात है कि अमेरिका ने जिस सोच के तहत टैरिफ़ की घोषणा की है। वह रेसिप्रोकल टैरिफ़ हैं। इसलिए देशों के अनुसार टैरिफ़ अलग अलग अनुपात में निर्धारित किया है, जो इस प्रकार है:-

  • भारत 27(वर्तमान 50%)  2- पाकिस्तान-29%  3-चीन- 54%  4-बंग्लादेश- 37%
  • श्रीलंका- 44%  6- वियतनाम- 46%  7- म्यांमार- 44%   8- कंबोडिया 49%
  • लाओस- 48%   9 – थाईलैंड- 36%  10- ताईवान- 32%  11-  इंडोनेशिया- 32%
  • कजाकिस्तान- 27%    13-  साऊथ कोरिया- 25%   14- जापान- 24%
  •  मलेशिया- 24%  16- ब्रुनेई- 24%  17-  फ़िलिपिंस- 17%  18- सिंगापुर-10%

यू.एस. टैरिफ़ के भारत पर प्रभाव:-

वर्तमान दौर वास्तव में “वसुधैव कुटुम्ब” को उजागर करता है। अब यहां देशों के आपसी संबंध, उनकी नितियां अन्य देशों को हर तरह से प्रभावित करती हैं। यहां तक कि देश के नागारिकों का जीवन स्तर, उनकी दैनिक आय पर भी सीधा प्रभाव देखा जा सकता है। ऎसी स्तिथि में अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ़ भारत के लिए क्या अर्थ रखता है, यह विचारणीय है। 06 अगस्त 2025 में 27% से शुरु हुआ परंतु भारत और रशिया के अच्छे संबंध के चलते अमेरिका ने नाराजगी टैरिफ़ की आक्रामकता के रुप में दिखाई, व दिसंबर 2025 तक यह 50% बढा दिया गया, ऎसा कई विश्लेषक मानते हैं।

यद्यपि अमेरिका के इस कदम को अंतराष्ट्रीय जगत पर प्रशंसा नहीं मिली, ट्रंप की आलोचना हुई। अब भारत के समक्ष नई चुनौति आ खडी हुई कि वर्तमान दौर जहां युद्ध की विभीषिका से गुजर रहा है।विश्व स्तर पर मंदी का दौर है।ऎसी स्तिथि में भारतीय निर्यातकों को अमेरिका के टैरिफ़ से निपटने के लिए, अर्थव्यवस्था के घाटे को कम करने, स्तिथि को बिना नुकसान के काबू में करने जैसे प्रश्न खडे हो गये। फ़ार्मासूटिकल,रत्न, चमडा, कपडा, आटो पार्ट्स, के क्षेत्र में अमेरिका भारत के लिए बडा निर्यातक था।

  • भारतीय रुपय की गिरावट ने इस घाटे को कुछ हद कम करने मदद की। फ़िर भी अगस्त से दिसंबर तक की अवधि में अमेरिका के निर्यात में कमी आयी। जिससे वस्त्र, आभूषण, झींगा, कालीन, आटोपार्ट्स क्षेत्र में 50% की निर्यात में कमी आई है।
  • एम.एस.एम.इ. को कम मार्जिन और प्रतिस्पर्धा का सामना करना पडा है।
  • भारत के उत्पाद वियतनाम और बंग्लादेश के उत्पादों की तुलना में कम प्रतिस्पर्धी हो गए हैं।
  • भारतीय व्यापार, अब एक नई व्यापार नीति की ओर अग्रसर है।जहां अब एक्स्पोर्ट डायवर्सिफ़िकेशन, निर्यात विविधकरण की ओर ध्यान दे रहा है।
  • नये बाजारों की खोज जारी है।
  • अमेरिका के साथ टैरिफ़ पुनरसंरचना की ओर प्रयास कर रहा है कि आने वाला समय बेहतर हो सके।
  • भारत वैकल्पिक बाजार जैसे दक्षिण अफ़्रिका, लैटिन अमेरिका और यूरोप के कई देशों की ओर रुख कर रहा है।

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Date: 27/12/2025