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क्या हिन्दी भाषा के लिए ए आइ उपयोगी है? – Dr. Neelima Dubey

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ए आई यानि कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे जीवन का सच है जिसके बिना वर्तमान जीवन शैली की कल्पना ही नहीं की जा सकती। जिस तरह एआई कि चर्चा आजकल है, वह पूर्ण रुप से नया है, ऎसा नहीं है। एआई का प्रयोग हम पिछले कुछ दशकों से लगातार करते आ रहे हैं। जैसे ट्रेफ़िक कंट्रोल सिस्टम का अपने आप काम करना,चिकित्सा के क्षेत्र में बीमारी का पता लगाना भी AI के प्रयोग हैं। वास्तव में तकनीकी युग की सबसे बडी क्रांति है

कृत्रिम बुद्धिमत्ता।

हिन्दी के विकास में आधारभूत प्रोद्योगिकी – हिन्दीडिजिटल यात्रायानि एनएलपी के केन्द्र में ओपन सोर्स लाईब्रेरी और टुलकिट हैं। जो हिन्दी के लिए डिजाइन किए गए हैं। ’इंडिका एनएलपी सुईट’ सबसे मुख्य है।जो भारतीय भाषाओं और हिन्दी के विकास में तेजी से लाने के लिए व्यापक संग्रह है। ये मोनोलिंग्विल कॉर्पोरा (इंडिक कॉर्प) पूर्व प्रशिक्षित भाषा मॉडल (इंडिक बर्ट) और मानकीकृत मूल्यांकन बेंचमार्क (इंडिकग्लूई) जैसे मूलभूत घटक प्रदान करता है। जो नये एआइ सिसटम के प्रशिक्षण व परीक्षण के लिए आवश्यक है।

दूसरा महत्वपूर्ण टूलकिट इंडिक एनएलपी लाईब्रेरी है। जो समान्य पाठ वाचनन के आधार पर कार्य करता है।

हिन्दी अधिग्रहण के लिए एआइ उपकरण – हिन्दी सिखने वालों के लिए एआइ ने नये द्वार खोले हैं। ’टॉकपाल’ जैसे प्लेटफ़ार्म संवादात्मक एआइ का प्रयोग करते हैं। जो चैटबॉक्स के द्वारा बातचीत कर आत्मविश्वास बढाते हैं। ’ड्रॉप्स’ चित्रों के माध्यम से शब्दावली सीखाने का काम करता है। इस तरह एआइ ट्यूटर का काम करता है। जो कहीं भी किसी भी समय उपलब्ध हो सकता है।

हिन्दी के बडे एआइ भाषा मॉडल 2025 में हिन्दी एनएलपी क्षेत्र में कई बडे भाषा मॉडल उभरे हैं। Qwen3-235B-a22B अपने विशाल मिक्सर-ऑफ़- एक्सपर्ट आर्किटेक्चर के साथ 100 से अधिक भाषाओं का समर्थन करता है।अधिक प्रभावी अनुप्रयोगों के लिए मेटा-लामा-3.1-8बी-इंस्ट्र्क्टर उत्कृष्ट बहुभाषी संवाद क्षमताएं प्रदान करता है। इसके अलावा Qwen3- 14 B प्रदर्शन और दक्षता के बीच संतुलन बनाता है।

इंडिकबर्ट जो इंडिक कॉर्प डेटासेट पूर्व प्रशिक्षित बहुभाषी मॉडल है। यह भी महत्वपूर्ण है। भाषण और आवाज़ संश्लेषण प्रोद्योगिकियां एआइ वायस जनरेटेर ने लिखित हिन्दी को स्पष्ट मानव जैसी भाषा में बदलने बहुत मदद की है। इसके इनपुट टेक्स्ट के व्याकरण,टोन, और संदर्भ का विश्लेषण करने के लिए डीप लर्निग मॉडल का उपयोग करते हैं। इसे टेक्सट टू स्पीच कहा जाता है। मनोरंजन में इसका प्रयोग डबिंग और ऑडियो बुक बनाने के लिए किया जाता है।

उपर्युक्त जानकारी की श्रृंखला में हम अब उन तथ्यों की बात करेंगे जो एआइ के संदर्भ में हिन्दी के लिए महत्वपूर्ण हैं। जैसे-

  • टेक्सट टू स्पीच और स्पीच टू टेक्सट
  • वाक पहचान प्रोद्योगिकी
  • चैट बॉक्स और वर्चुअल असिस्टेंट
  • व्याकरण वर्तनी सुधार उपकरण
  • मशीनी अनुवाद
  • हिन्दी साहित्य का डिजिटलीकरण
  • हिन्दी समग्री निर्माण – जनरेटिव एआइ

टेक्सट टू स्पीच और स्पीच टू टेक्सट को टीटीएस और एसटीटी सिस्टम भी कहा जाता है। इसे बनाने के लिए स्वर विज्ञान, ध्वनि विज्ञान, वाक्य विन्यास, छंद विन्यास को मशीन को गहराई से समझाया जाता है।  आधुनिक टेक्सट टू स्पीच सिस्टम कंटेनेटिव संश्लेषण, पैरामेट्रिक मॉडलिंग और तंत्रिका नेट्वर्क पर आधारित होता है। न्युरल टीटीएस मॉडल से हिन्दी की अभिव्यक्ति और सटीकता में सुधार करता है। स्पीच टू टेक्सट में ध्वनि मॉडल फ़ोनेम टू साउंड सिस्टम के संबंध महत्वपूर्ण होते हैं। जो उच्चारण, पृषठ्भूमि शोर और भाषण दर में परिवर्तन को संभालते हैं।

  • इनका प्रयोग सोशल मीडिया मॉनिटरिंग,रियल टाइम अनुवाद,और इंटरैक्टिव लर्निग प्लेटफ़ार्म केलिए हो रहा है। यहां अति आधुनिक ’आटोरेग्रेसिव मॉडल’ की चर्चा जरुरी है। इससे आवाज़ की क्लोनिंग की जाती है। जो अच्छी गुणवत्ता, स्टूडियो-रिकार्ड किए डेटा को मिनिटों में संभव कर देता है। SV2TTS जैसे मॉडल ऑडियो के कुछ ही सेकेंड में नये स्पीकर की आवाज़ की नकल सीख लेते हैं।
  • वाक पहचान प्रोद्योगिकी हिन्दी भाषा के लिए प्रशिक्षण और अधिक व्यापक बनाने के लिए विविध डेटासेट के लिए प्रयास किया जा रहा है। जो उसके क्षेत्रिय उच्चारणों के रहते सही आउट्पुट देने में और भी मदद करे। डीप न्युरल नेटवर्क इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
  • हिन्दी चैट बॉक्स और वर्चुअल असिस्टेंट भारत के वरदान है। यह देशी संचार को प्रमुखता देता है। बैंक, ई-कॉमर्स, सरकारी पोर्टल, शिक्षा की एप्स, स्वास्थ सेवाएं, यात्रा बुकिंग,ट्रेन शेड्युल, पर्यटन, स्थानिय त्योहारों के सुझावों में इनका दैनिक प्रयोग है। हिन्दी चैट बॉक्स एनएलपी मॉडल, मशीन लर्निंग,एल्गोरिदम और डेटा पाइपलाइनों के संयोजन पर निर्भर है। संदेश के मुख्य तत्वों की पहचान करने लिए तेक्सट इनपुट को टोकनाइजेशन करने के लिए,स्केनिंग और इकाई पहचान सहित प्रीप्रोसेसिंग से गुजरना पड्ता है।इसके इंजन में अर्थों क वर्गीकरण, संवाद का प्रबंध माड्युल शामिल होता है। जिनसे प्रश्नों को समझने, लक्ष्यों या कार्यों के मैप करने में मदद मिलती है। वर्तमान में एआइ और एनएलपी ने हिन्दी चैटबॉक्स में काफ़ी वृद्धि की है। BERT और Indic BERT बहुभाषी वेरिएंट जैसे ट्रांस्फ़ार्मर आधारित मॉडल प्रासंगिक एम्बेडिग प्रदान करते हैं।
  • हिन्दी व्याकरण वर्तनी सुधार उपकरण के संदर्भ में सुधार तेजी से हो रहा है। ट्रिंका एआइ जैसे उपकरण गुणवत्ता त्रुटिमुक्त शोधपत्र तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान देने में समर्थ है। ब्राउजर एक्स्टेंशन और की बोर्ड एप जैसे वर्क फ़ेलो में एआइ लेखन में मदद करता है। इसमें सबसे बडी चुनौति हिंग्लिश के कारण होती है। जहां एल्गोरिदम में भ्रम की स्तिथि बन जाती है।
  • हिन्दी मशीनी अनुवाद ग्रमिण वक्ता स्थानिय तरह से उच्चारण करते हैं, शहरी युवा अंग्रेजी कि हिन्दी में शामिल करते हैं इसलिए मशीनी अनुवाद सरल प्रवाह बनाये रखने के लिए संघर्ष करता है। हिन्दी काव्य लय अर तुकबन्दी पर आधारित है। जहां शब्दिक अनुवाद भावनात्मक गहराई खो देते है। पौराणिक व लोक कथाएं मुहावरेदार भाषा का होती है,जो शब्दानुवाद में बाधा डालती है। इसलिए अर्थ का अनर्थ हो जाता है। न्युरल मॉडल हिन्दी की आकृति की बडे पैमाने पर मांग करते हैं। मूल्यांकन मैट्रिक्स अंग्रेजी केन्द्रित बेंचमार्क का पक्ष लेते हैं। बी एल ई यू स्कोर शब्दार्थ की निष्ठा को कम करता है।
  • हिन्दी साहित्य का डिजिटलीकरण में प्रशिक्षित ऑप्टिकल केरेक्टर रिकग्नेशन (OCR) की बडी भुमिका है।जो किसी भी पांडुलिपि या हस्तलिखित प्रतियों को स्कैन करते  वक्त प्रयोग की जाती है। देवनागिरी में डीप लर्निग सिस्टम व मशीन लर्निग पर निर्भर है। कन्वोल्युशनल न्युरल नेटवर्क (CNN) छवियों, आकृतियों का पता लगाने, वर्णों के जटिल विवरण को समझने का काम करता है। इसे एनसीपी के साथ मिलाकर एआइ विश्लेषण, शिक्षा, और संचार की क्षमता को अनलॉक करता है।
  •  हिन्दी समग्री निर्माण – जनरेटिव एआइ सिस्टम मूल रुप से नई साम्ग्री बनाने में सक्षम हैं।ये तकनीक “प्रॉम्प्ट” के रुप में रचनात्मक तरीके से पाठ, चित्र और मल्टीमीडिया सामग्री उत्पन्न कर सकती है।ये प्रणालियां हिन्दी पाठ और अन्य मीडिया से भाषा पेटर्न, व्याकरण, सांस्कृतिक संदर्भ सीख समझ लेते हैं।

सरल शब्दों में कहा जाय तो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस मनुष्य का एक मजबूत सहायक सिद्ध हो सकता है।अगर उसका उपयोग सोच समझ कर किया जाय। समझने वाली बात है कि एआइ लार्ज लेंग्वेज मॉडल य़ानि (एलएलएम) सर्च इंजन पर आधारित होता है।ये एक ऎसा प्रोग्राम है, जिसमे अथाह डेटा संकलित होता है। जो इंसानी भाषा को समझने, प्रोसेस करने और नई टेक्स्ट डिजाइन करने के लिए बनाया गया है। या यूं कह सकते है कि ये प्रोग्राम करोंडों किताबों, लेखो, और इंटरनेट डेटा से सीख कर मानवों की तरह बातचीत कर सकता है।

एलएलएम खरबों शब्दों के डेटा के आधार पर बनाया जाता है। ताकि ये भाषा की बारीकियां और उनके अर्थ समझ ले। आधुनिक एलएलएम ट्रांसफ़ार्मर आर्किटेक्चर पर आधारि होते हैं। इनके द्वारा सटीक अनुवाद किया जा सकता है।कहानियां लेख और ईमेल लिखए जा सकते है। कोडिग की जा सकती है। लंबे दस्तावेज संक्षिप्त किए जा सकते है। चैट बॉक्स के माध्यम से प्रश्नोत्तर दिए जा सकते हैं। Chat GPT, BERT, GPT-4 , PaLM, Gemini इसके उदाहरण हैं।

हिन्दी शिक्षण और साहित्य में एआइ के माध्यम से रचनात्मक प्रयोग किए जा सकते हैं। इसके कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:-

  • विडियो या पीपीटी बनाना हो जेमिनी एआइ का प्रयोग किया जा सकता है। इसका Hey Gen एआइ हिन्दी शिक्षकों के लिए एक अच्छा विकल्प है। इसमें हम डेटा का उपयोग भी कर सकते हैं।
  • गामा एआइ द्वारा हम अपनी आवाज़ में पुरा विडियो बना सकते हैं। ये पेड वेर्जन होते हैं।
  • चैट जीपीटी सबसे अधिक उपयोग होने वाला एआइ है।
  • जेमिनी के परिणाम अधिक बेहतर गुणवत्ता लिए होते है। इसमे सही प्राम्ट और निर्देश देने से आश्चर्यजनक परिणाम मिलते हैं। इसके साथ ही केन्वास और नैनो बनाना का उपयोग भी किया जा सकता है।
  • नोट्बुक एआइ एजेंट का उपयोग क्विज या प्रश्नपत्रों को बनाने मे किया जा सकता है। जिसमे पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र डालकर प्राम्ट दि जा सकती है कि बिना प्रश्न दोहराये नया प्रश्नपत्र बनाएं। इनमें किसी भी आडियो या वीडियो को पेस्ट करके ओवरव्यूह के लिये भी बोला जा सकता है जो मिनिटों में बनकर तैयार हो जाता है।

निष्कर्ष के रुप मे कहा जा सकता है कि एआइ प्रोद्योगिकी मानव जीवन की जटिलताओं का हल है। समय की बचत है यह बचा हुआ समय किसी अन्य सृजनात्मकता में उपयोग किया जा सकता है। हिन्दी भाषा व साहित्य में अपार संभावनाएं है। सुनहरे भविष्य का यथार्थ हमारे सही दिशा में उठे कदम ही तय करेंगे।